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गणेश चतुर्थी
सनातन धर्म के आदि पंच देवों में श्रीगणेश एक प्रमुख देव माने जाते हैं। भगवान गणेश (Lord Ganesha) रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता माने गए हैं। वह भक्‍तों की बाधा, सकंट, रोग-दोष तथा दरिद्रता को दूर करते हैं। शास्‍त्रों के अनुसार माना जाता है कि श्री गणेश जी की विशेष पूजा का दिन बुधवार (Wednesday)है। वहीं वहीं प्रथम पूज्य श्रीगणेश का प्रमुख त्योहार गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi माना जाता है। जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। मान्यता है कि गणेश जी का जन्म Borth of Shree Ganesh भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, सोमवार, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था। इसलिए यह चतुर्थी मुख्य गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहलाती है। इस साल यानि 2020 में यह गणेश चतुर्थी का पर्व 22 अगस्त, 2020 (शनिवार) को मनाया जाएगा।
  • Start Date: August 22, 2020
  • End Date: August 31, 2020
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हरतालिका तीज
हरतालिका तीज पर कुंआरी कन्याएँ अपने मन के अनुरूप पति को प्राप्त करने हेतु माँ गौरी व भगवान शंकर की पूजा एवं व्रत करती हैं। यह त्यौहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आता है, तथा हरतालिका व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है। नई विधा के अनुसार कुछ सौभाग्यवती स्त्रियां भी हरतालिका व्रत का पालन करतीं हैं। हरतालिका तीज का शाब्दिक अर्थ क्रमशः हरत अर्थात अपहरण, आलिका का अर्थ स्त्रीमित्र (सहेली) तथा तीज-तृतीया तिथि से लिया गया है। हरतालिका तीज की कथा के अनुसार, देवी पार्वतीजी की उनकी सहेलियां अपहरण कर उन्हें घने जंगल में ले गई थीं। जिससे कि पार्वतीजी के पिता उनका विवाह, उनकी ही इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न कर दें। हरतालिका तीज पर माता पार्वती(माता शैलपुत्री) और भगवान शंकर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू, रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा बनाते हैं। इसमें भगवान शिव को धोती-अंगोछा चढ़ाया जाता है। तथा सुहाग सामग्री अपनी सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान दे दिए जाते हैंखोलें। इस प्रकार पूजन के बाद कथा सुनें और रात्रि जागरण करने का विधान है, आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिन्दूर चढ़ाएं व हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें। हरतालिका तीज त्यौहार कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु में को गौरी हब्बा नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में पूजा जाता है। गौरी हब्बा के दिन महिलाएं स्वर्ण गौरी व्रत रखती हैं व माता गौरी से सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं।
  • Start Date: August 21, 2020
  • End Date: August 21, 2020
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जन्माष्टमी
जन्माष्टमी (Janmashtami 2020) के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हर साल जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2020 Date) का त्योहार भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। लेकिन इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर दो मत हैं। पंचांगों में 11 और 12 अगस्त को जन्माष्टमी बताई गई है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, 12 अगस्त को जन्माष्टमी मानना श्रेष्ठ है। मथुरा और द्वारिका में 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जबकि जगन्नाथ पुरी, काशी और उज्जैन में 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। जानिए क्यों आ रहा तारीखों में भेद- पुराणों के अनुसार, जन्माष्टमी का त्योहार भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाता है। कई बार ग्रहों की चाल के चलते यह तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक नहीं हो पाते। पूजा का शुभ समय- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा इस दिन चंद्रमा मेष राशि में और सूर्य कर्क राशि में रहेगा। जिसके कारण वृद्धि योग भी होगा। 12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है। पूजा की अवधि 43 मिनट तक रहेगी। जानिए कैसे करें पूजा- 1. चौकी में लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान कृष्ण के बालस्वरूप को पात्र में रखें। 2. फिर लड्डू गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान करवाएं। 3. भगवान को नए वस्त्र पहनाएं। 4. अब भगवान को रोली और अक्षत से तिलक करें। 5. अब लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग लगाएं। श्रीकृष्ण को तुलसी का पत्ता भी अर्पित करें। 6. भोग के बाद श्रीकृष्ण को गंगाजल भी अर्पित करें। 7. अब हाथ जोड़कर अपने अराध्य देव का ध्यान लगाएं।
  • Start Date: August 12, 2020
  • End Date: August 12, 2020
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कजरी तीज
भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है. इस साल कजरी तीज का पर्व 6 अगस्‍त को है. इस तीज को कई जगह सातुड़ी तीज भी कहते हैं. यह व्रत निर्जला रखा जाता है. यह पर्व उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्यों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. व्रत मुहुर्त - कजरी तीज का व्रत पांच अगस्त को रात 10:50 मिनट पर शुरू हो जाएगा क्‍योंकि इसी समय तृतीया तिथि आरंभ हो जाएगी. यह 6 अगस्त की मध्‍य रात्रि 12:14 बजे तक रहेगी. यानि कि 7 अगस्‍त की तारीख लगने तक तृतीया रहेगी. इसीलिए महत्‍वपूर्ण है यह व्रत - यह व्रत सुहागन स्त्रियां सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं. यह व्रत निर्जला रखा जाता है. हालांकि गर्भवती महिलाएं जल और फलाहार ले सकती हैं. व्रत पूजा की विधि - इस दिन महिलाएं नीमड़ी माता की पूजा करती हैं. इसके लिए मिट्टी और गोबर से दीवार के किनारे तालाब के जैसी आकृति बनाई जाती है और उस पर घी और गुड़ से पाल बांधा जाता है. तालाब के पास नीम की टहनी को रोपा जाता है. बनाए गए तालाब में कच्चा दूध और जल डालकर दिया प्रज्वलित किया जाता है. नीमड़ी माता को जल और रोली लगाने के बाद अक्षण चढ़ाएं. फिर अनामिका उंगली से अनामिका उंगली से नीमड़ी माता के पीछे की दीवार पर मेहंदी, रोली की 13 बिंदिया लगाएं. इसके बाद तर्जनी उंगली से काजल की 13 बिंदी भी लगाएं. नीमड़ी माता को मोली चढ़ाएं और उसके बाद मेहंदी, काजल और वस्त्र भी अर्पित करें. फिर उसके बाद जो भी चीजें आपने माता को अर्पित की हैं, उसका प्रतिबिंब तालाब के दूध और जल में देखें. इसके बाद गहनों और साड़ी के पल्ले का प्रतिबिंब भी देखें. माना जाता है कि ऐसा करने से सुहाग, सुख-समृद्धि बनी रहती है. वहीं अगले दिन नहा-धोकर गाय को गुड़ खिलाने के बाद व्रत खोलना चाहिए.
  • Start Date: August 06, 2020
  • End Date: August 06, 2020
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रक्षा बंधन 2020
अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है। श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है।
  • Start Date: August 03, 2020
  • End Date: August 03, 2020
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गुरु पूर्णिमा
हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 5 जुलाई को पड़ रही है। 5 जुलाई रविवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है।
  • Start Date: July 05, 2020
  • End Date: July 05, 2020
  • Organizer: हिन्दू त्यैहार
  • Sponsor: Festival
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प्रदोष व्रत (शुक्ल)
2 जुलाई को शुक्ल प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है। यह व्रत प्रति माह में दो बार त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी में और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी में।
  • Start Date: July 02, 2020
  • End Date: July 02, 2020
  • Organizer: हिन्दू त्यैहार
  • Sponsor: Festival
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देवशयनी एकादशी / अषाढ़ी एकादशी
1 जुलाई को देवशयनी एकादशी व्रत रखा जाएगा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसी दिन से चतुर्मास प्रारंभ हो जाते हैं जिसके बाद चार महीनों तक मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।  इसी दिन से जगत के पालनहार भगवान विष्णु जी पाताल लोक में चार माह तक सोने के लिए चले जाते हैं। जिसके बाद धरती पर किसी प्रकार का मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। माना जाता है कि चतुर्मास के दौरान सूर्य व चंद्र का तेज पृथ्वी पर कम पहुंचता है, जल की मात्रा अधिक हो जाती है, वातावरण में अनेक जीव-जंतु उत्पन्न हो जाते हैं, जो अनेक रोगों का कारण बनते हैं। इसलिए साधु-संत, तपस्वी इस काल में एक ही स्थान पर रहकर तप, साधना, स्वाध्याय व प्रवचन आदि करते हैं।
  • Start Date: July 01, 2020
  • End Date: July 01, 2020
  • Organizer: हिन्दू त्यैहार
  • Sponsor: Festival